परफ्यूम का प्राचीन इतिहास — ‘Per Fumum’ से आधुनिक खुशबू तक
हजारों साल पहले ही मेसोपोटामिया और मिस्र में परफ्यूम की शुरुआत हो गई थी। शुरुआत में खुशबूदार जड़ी-बूटियों और रेज़िन को जलाकर धूप के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता था। “परफ्यूम” शब्द भी लैटिन भाषा के “Per Fumum” (धुएं के माध्यम से) शब्द से बना है।
प्राचीन मिस्रवासी सुगंधित तेलों और पौधों के सत्त को पूजा-पाठ और ममी बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल करते थे। कुछ लोग तो सिर पर खुशबू छोड़ने वाले मोम के कोन भी पहनते थे।
मेसोपोटामिया में लगभग 1200 ईसा पूर्व रहने वाली टप्पुटी को दुनिया की पहली दर्ज की गई रसायन-शास्त्री माना जाता है — उन्होंने खुशबू निकालने की तकनीकें विकसित की थीं।
इसके बाद यह कला यूनानियों और रोमन लोगों तक पहुंची, जहाँ नहाने और दैनिक जीवन में परफ्यूम का खूब उपयोग होने लगा।
आगे चलकर फ्रांस के ग्रास (Grasse) शहर ने आधुनिक परफ्यूम उद्योग का केंद्र रूप ले लिया — शुरू-शुरू में वहाँ परफ्यूम चमड़े को टैन करने की बदबू छुपाने के लिए बनाया जाता था।
आज भी परफ्यूम सिर्फ खुशबू नहीं — यह इतिहास, एक कला और एक एहसास है।

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